Wednesday, June 8, 2011

gajal

केवल उस तकिये ने देखा ,बिन मौसम बरसात |
जिसने दिया सहारा सर को ,तनहा सारी रात |

कितना दर्द  दबा रक्खा ,दिल के तहखाने ने ,
मुस्काती आँखें हरजाई ,कह दी सारी बात |

जलता तिल-तिल झिलमिल-झिलमिल स्नेह भोर की आस ,
अदना दीपक क्षीण वर्तिका ,उसपर झंझावात |

मस्त फकीरा खाली झोली ,लेकिन हृदय विशाल ,
भीख दया की उसे न भाये ,ना कोई खैरात |

बिस्तर धरती अम्बर चादर ,घर सारा संसार ,
तोलेगा दौलत से उसको ,किसकी ये अवकात|

बिन बोले कुछ चलागया कल ,ना जाने किस ओर ,
छोड़ गया कुछ खट्टे- मीठे ,अनुभव के सौगात |

                                रघुनाथ प्रसाद

11 comments:

  1. केवल उस तकिये ने देखा ,बिन मौसम बरसात |
    जिसने दिया सहारा सर को ,तनहा सारी रात |
    ...वाह!

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  2. केवल उस तकिये ने देखा ,बिन मौसम बरसात |
    जिसने दिया सहारा सर को ,तनहा सारी रात |

    बहुत सुन्दर ...

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  3. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 14 - 06 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच- ५० ..चर्चामंच

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  4. केवल उस तकिये ने देखा बिन मौसम बरसात ...
    बहुत सुन्दर !

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  5. बहुत खूबसूरत मत्ला है। ग़ज़ल भी शानदार है। बधाई स्वीकार करें।

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  6. कितना दर्द दबा रक्खा ,दिल के तहखाने ने ,
    मुस्काती आँखें हरजाई ,कह दी सारी बात |

    बहुत ही उम्दा शेर...
    बहुत बेहतरीन ग़ज़ल...
    बहुत खूब.

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  7. केवल उस तकिये ने देखा ,बिन मौसम बरसात |
    जिसने दिया सहारा सर को ,तनहा सारी रात |

    बहुत खूब..बहुत ख़ूबसूरत गज़ल..

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  8. केवल उस तकिये ने देखा ,बिन मौसम बरसात
    जिसने दिया सहारा सर को ,तनहा सारी रात ...

    लाजवाब शेर है इस ग़ज़ल का ... कमाल का लिखते हैं आप ...

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  9. गुड्डोदादीSeptember 18, 2011 at 12:38 AM

    केवल उस तकिये ने देखा ,बिन मौसम बरसात |

    जिसने दिया सहारा सर को ,तनहा सारी रात
    बहुत सुंदर मोतियों की माला में पिरोई

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  10. गुड्डोदादीSeptember 18, 2011 at 10:20 AM

    options
    guddo dadi माँ की शिक्षा संस्कार- 2:41 AM- - Friends

    gajal

    केवल उस तकिये ने देखा ,बिन मौसम बरसात |
    जिसने दिया सहारा सर को ,तनहा सारी रात |


    कितना दर्द दबा रक्खा ,दिल के तहखाने ने ,
    मुस्काती आँखें हरजाई ,कह दी सारी बात |


    जलता तिल-तिल झिलमिल-झिलमिल स्नेह भोर की आस ,
    अदना दीपक क्षीण वर्तिका ,उसपर झंझावात |


    मस्त फकीरा खाली झोली ,लेकिन हृदय विशाल ,
    भीख दया की उसे न भाये ,ना कोई खैरात |

    बिस्तर धरती अम्बर चादर ,घर सारा संसार ,
    तोलेगा दौलत से उसको ,किसकी ये अवकात|

    बिन बोले कुछ चलागया कल ,ना जाने किस ओर ,
    छोड़ गया कुछ खट्टे- मीठे ,अनुभव के सौगात |

    रघुनाथ प्रसाद भाई जी की show
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    view more repliesLoading... PAWAN ARORA मेरा मजहब '' प्यार और वफ़ा ' मस्त फकीरा खाली झोली ,लेकिन हृदय विशाल ,
    भीख दया की उसे न भाये ,ना कोई खैरात |

    bahut hi khub dadi ji aapko mera parnaam Read full reply3:34 AM
    Priyanka Bharati केवल उस तकिये ने देखा ,बिन मौसम बरसात |
    जिसने दिया सहारा सर को ,तनहा सारी रात | bahut sundar paknti h dadi 6:23 AM
    D♥Solitary♥Soul♥ (ॐ) D artistic imagination Parnaam Maa,

    Aapne jo poem "केवल उस तकिये ने देखा ,बिन मौसम बरसात |" bheja hai woh mujhe bohat hi aacha laga. Aur maine aapse kaal kaha tha k main aap ko mera ek naya art dikhaunga.

    To kripiya aap mere photo album check kijiye. Read full reply9:44 AM

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